Page de couverture de Plague ki Chudail [Plague Witch]

Plague ki Chudail [Plague Witch]

Aperçu
Essayer pour 0,00 $
Choisissez 1 livre audio par mois dans notre incomparable catalogue.
Accès illimité à notre catalogue d'écoute à volonté de plus de 15 000 livres audio et balados
Accédez à des promotions et à des soldes exclusifs.
L'abonnement Premium Plus se renouvelle automatiquement au tarif de 14,95 $/mois + taxes applicables après 30 jours. Annulation possible à tout moment.

Plague ki Chudail [Plague Witch]

Auteur(s): Master Bhawan Das, Priyanka Sarkar - translator
Narrateur(s): Rohini Raja
Essayer pour 0,00 $

Après 30 jours, 14,95$/mois. Annulable en tout temps.

Acheter pour 7,30 $

Acheter pour 7,30 $

À propos de cet audio

मास्टर भगवानदास

भारतरत्न डाक्टर भगवानदास (१२ जनवरी १८६९ - १८ सितम्बर १९५८) भारत के प्रमुख शिक्षाशास्त्री, स्वतंत्रतासंग्रामसेनानी, दार्शनिक (थियोसोफी) एवं कई संस्थाओं के संस्थापक थे। सन्‌ १९५५ में उन्हें भारतरत्न की सर्वोच्च उपाधि से विभूषित किया गया था। डॉक्टर भगवानदास का जन्म १२ जनवरी १८६९ ई. में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। वे वाराणसी के समृद्ध साह परिवार के सदस्य थे। सन्‌ १८८७ में उन्होंने १८ वर्ष की अवस्था में पाश्चात्य दर्शन में एम. ए. की उपाधि प्राप्त की। १८९० से १८९८ तक उत्तर प्रदेश में विभिन्न जिलों में मजिस्ट्रेट के रूप में सरकारी नौकरी करते रहे। सन्‌ १८९९ से १९१४ तक सेंट्रल हिंदू कालेज के संस्थापक-सदस्य और अवैतनिक मंत्री रहे। १९१४ में यही कालेज काशी विश्वविद्यालय के रूप में परिणत कर दिया गया। डॉ॰ भगवान्‌दास हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक-सदस्यों में से एक थे। सन्‌ १९२१ मे काशी विद्यापीठ की स्थापना के समय से १९४० तक उसके कुलपति रहे। असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण सन्‌ १९२१ में इन्हें कार्य से मुक्त कर दिया गया। किंतु वर्ष के शेष महीनों में घर से अलग काशी विद्यापीठ में रहते हुए एकांतवास करके उन्होंने कारावास की अवधि पूरी की। १९३५ में उत्तरप्रदेश के सात शहरों से भारत की केंद्रीय व्यवस्थापिका सभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया और एकांत रूप से दार्शनिक चिंतन एवं भारतीय विचारधारा की व्याख्या में संलग्न रहे। भारत के राष्ट्रपति ने सन्‌ १९५५ में उन्हें भारतरत्न की सर्वोच्च उपाधि से विभूषित किया।

Please note: This audiobook is in Hindi.

©2022 Priyaka Sarkar (P)2022 Audible, Inc.
Historique Roman policier
Pas encore de commentaire